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भंसाली की पद्मावती का फ्रेंच कनेक्शन भी हो सकता है!


संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर देशभर में बहस-मुबाहिसों का दौर जारी है।

राजपूत संगठन करणी सेना फिल्म के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म में रानी पद्मावती का किरदार निभानेवाली अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के खिलाफ फतवा जारी कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार समेत करीब आधा दर्जन भाजपा व भाजपा समर्थित राज्य सरकारों ने फिल्म का प्रदर्शन अपने राज्यों में नहीं करने देने की घोषणा की है।

वहीं, दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में फिल्म का प्रदर्शन होगा।

फिल्म पर विवाद टीवी चैनलों की टीआरपी बढ़ाने के लिए बड़ी खुराक बन गया है। सोशल मीडिया पर भी पद्मावती पर खूब चर्चा हो रही है।


मोटे तौर पर माना जा रहा है कि यह फिल्म मलिक मुहम्मद जायसी की काल्पनिक रचना पद्मावत पर आधारित है। जायसी की पद्मावत पर टीवी चैनलों व सोशल मीडिया में इतनी चर्चा हो चुकी है कि कहानी सबकी जुबान पर चढ़ गयी है।

लेकिन, संजय लीला भंसाली पूरे विवाद को लेकर अब तक चुप्पी की चादर ताने हुए हैं। उनकी चुनी हुई चुप्पी से लगता है कि पद्मावती की कहानी उतनी ही नहीं होगी जितनी मलिक मोहम्मद जायसी ने लिखी है।

इस फिल्म का फ्रेंच कनेक्शन भी हो सकता है! ऐसा मानने के पीछे वजह यह है कि संजय लीला भंसाली फ्रेंच कंपोजर रॉबर्ट रॉसेल द्वारा 1923 में रचे गये गीतिनाट्य ‘पद्मावती’ का मंचन पिछले 9 सालों में दो बार कर चुके हैं।



उन्होंने वर्ष 2008 में पेरिस के ड्यू चैटलेट थियेटर में इस नाटक का मंचन किया था, जिसकी खूब सराहना हुई थी। भंसाली खुद भी इस नाटक से बहुत प्रभावित रहे और पेरिस के बाद इटली में उन्होंने इस म्यूजिकल ड्रामा का मंचन कर लोगों की वाहवाही लूटी।

पद्मावती नाटक का मंचन और इसके बाद इसी विषय पर फिल्म का निर्माण इस ओर इशारा कर रहा है कि उनकी फिल्म इसी नाटक पर आधारित हो सकती है।

यह नाटक लिखनेवाले अल्बर्ट रॉसेल मलिक मुहम्मद जायसी की पद्मावत से काफी प्रभावित थे और उन्होंने चित्तौरगढ़ का दौरा भी किया था। चित्तौरगढ़ जाकर उन्होंने शोध किया और फिर सन् 1923 में ‘पद्मावती’ ओपेरा लिखा।


अल्बर्ट का जन्म 5 अप्रैल 1869 में हुआ। वह म्यूजिक कंपोजर थे और उन्होंने पद्मावती समेत दर्जनों गीतिनाट्य लिखे।

अगर यह माना जाये कि संजय लीला भंसाली की फिल्म अल्बर्ट के नाटक पर आधारित है, तो फिल्म की रिलीज के बाद विवाद और भी बढ़ सकता है। इसका कारण यह है कि नाटक के आखिरी हिस्से में राजपुताना पौरुष की जगह रतन सिंह की कायरता को दर्शाया गया है। नाटक में बताया गया है कि अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध में जब राजा रतन सिंह नहीं जीत पाते, तो वह पद्मावती को खिलजी के हवाले करने का फैसला लेते हैं। इस फैसले से नाराज पद्मावती अपनी आबरू बचाने के लिए रतन सिंह का कत्ल कर खुद को आग के हवाले कर देती है।



वहीं, मलिक मुहम्मद जायसी के पद्मावत के अनुसार राजा रतन सिंह युद्ध के मैदान में अलाउद्दीन खिलजी से लड़ते हुए मारे जाते हैं और आबरू बचाने के लिए रानी पद्मिनी अन्य रानियों के साथ जौहर कर लेती है।

बहरहाल, देखना यह है कि भंसाली ने फिल्म की कहानी के लिए किसे स्रोत बनाया है और यह देखने के लिए फिल्म की रिलीज का इंतजार करना होगा।

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