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आखिरी वक्त तक धनंजय क्यों दोहराता रहा - ‘आमी निर्दोष’


14 अगस्त 2004 की सुबह करीब 4.30 बजे अलीपुर सेंट्रल जेल में धनजंय चटर्जी को फांसी दी गयी थी।

यह भी एक संयोग था कि धनंजय को जिस तारीख को (14 अगस्त) को फांसी दी गयी, उसी दिन उसका 39वां बर्थडे भी था।

कहते हैं कि मौत सामने हो, तो लोग झूठ नहीं बोलते, लेकिन धनंजय चटर्जी के सामने फांसी का फंदा झूल रहा था, तब भी वह यही दोहरा रहा था कि वह निर्दोष है।

उसे कोलकाता के भवानीपुर के आनंद अपार्टमेंट में रहनेवाली हेतल पारेख नाम की स्कूल छात्रा से बलात्कार व हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया था।

धनंजय चटर्जी उक्त अपार्टमेंट में सिक्टोरिटी गार्ड की नौकरी किया करता था। 5 मार्च 1990 की दोपहर हेतल पारेख अपने फ्लैट में मृत पायी गयी थी। कोलकाता पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट का संदेह धनंजय चटर्जी पर गया था और उसे कालिंदी स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया था।

मामले को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी। चूंकि उस वक्त तक निजी मीडिया चैनल भी आ गये थे, घटना होने के बाद से ही मीडिया ट्रायल शुरू हो गयी थी और आखिरकार कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए फांसी की सजा मुकर्रर कर दी थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं व वकीलों ने कोर्ट के फैसले से नाखुशी जाहिर की थी और कहा था कि धनंजय को न्याय नहीं मिला। उस वक्त आईएसआई कोलकाता के प्रोफेसर व वकीलों ने अपने स्तर पर मामले की तहकीकात की थी। तहकीकात में मिले तथ्यों के आधार पर उन्होंने एक किताब भी लिखी थी, जिसमें बताया गया था कि न्याय में कोताही हुई। किताब में मीडिया ट्रायल की भी तीखी आलोचना की गयी थी।

उस वक्त राष्ट्रपति रहे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के पास धनंजय की दया याचिका भेजी गयी थी, लेकिन उन्होंने यह याचिका खारिज कर दी थी।

मीडिया रपटों के अनुसार उसके गले में फंदा डालते वक्त हैंगमैन ने उससे कहा था, ‘धनंजय, मैं जो कुछ भी कर रहा हूं, उसके लिए मुझे माफ करना। सरकार और कोर्ट ने मुझे जो आदेश दिया है, मैं बस उसका पालन कर रहा हूं। मुझे माफ करना।’ इस पर धनंजय ने कहा था, ‘मैं आपको माफ करता हूं। भगवान आपको आशीर्वाद दें।’ उसने फंदे पर झूलने से पहले यह भी कहा था कि भगवान हम सब के लिए दयालू हों। हैंगमैन के अनुसार उसके चेहरे पर आखिर तक अपराध का कोई भाव नहीं था और वह खुद को निर्दोष बताता रहा था।

फांसी से पहले उसका एक लंबा इंटरव्यू लिया गया था। प्रख्यात फिल्म निर्देशक एम. एस. सथ्यू की डॉक्यूमेंटरी ‘द राइट टू लिव’ में इस इंटरव्यू को शामिल किया गया है। धनंजय चटर्जी ने इस इंटरव्यू में भी खुद को निर्दोष बताया था।

हाल ही में बांग्ला में धनंजय नाम से एक फिल्म भी बनायी गयी। इस फिल्म में भी फांसी की सजा पर सवाल उठाये गये हैं।

यहां रिपोर्ताज पेश कर रहा है धनंजय चटर्जी का वह इंटरव्यू, जिसमें उसने तमाम सवालों का बेबाकी से जवाब दिया था। इंटरव्यू शुरू होता है धनंजय के उस बयान से जिसमें वह कह रहा है- अगर मैंने कोई गलती की है, तो मुझे बेशक फांसी दें। मैं कुछ नहीं बोलूंगा। अगर प्रमाणित हो जाये, मुझे फांसी पर लटका दीजिये। मैंने राष्ट्रपति से भी कहा है कि लाई डिटेक्टर के सामने मुझसे पूछताछ की जाये। अगर मैं दोषी होऊंगा, तो कोई दया नहीं चाहूंगा। इस तरह के जघन्य अपराध के लिए मैं माफी नहीं चाहूंगा।

फिर पुलिस, आनंद अपार्टमेंट के लोग आपके खिलाफ क्यों हैं?

मैं पूरी तरह निर्दोष हूं। मैंने कोर्ट में यही कहा है। मैंने वकीलों को भी बोला है। मेरे खिलाफ षड्यंत्र हो रहा है।

वह लड़की उस वक्त स्कूल में पढ़ती थी। आप उसे देखा करते थे। जब आपने ड्यूटी की, तब भी उसे देखते थे? कभी आपने उस लड़की से बात की थी?

नहीं, मैं कभी किसी से बात नहीं करता था। जब मुझे लाइट या कुछ ठीक करने के लिए बुलाते थे, तब ही बात करता था। मैं नीचे में रहता था और जेनरेटर व वाटर पंप चलाया करता था।

आपके खिलाफ रेप के आरोप लगे हैं...

वो सब झूठ है।

आप सिनेमा खूब देखा करते थे?

नहीं,  मैं सिनेमा का वैसा भक्त नहीं। घर पर अगर व्यवस्था हो...तो... लेकिन उस दिन मुझे दोपहर 2 बजे ड्यूटी के बाद अपने भतीजे के घर जाना था..तो सिनेमा देखने के बाद 4 बजे अपने भतीजे के घर चला गया था। मुझे अपने गांव एक कार्यक्रम में जाना था इसलिए मैं सिनेमा देखने गया था। दोपहर दो बजे छुट्टी हुई तो सिनेमा देखने चला गया क्योंकि रात में मुझे अपने घर जाना था। 

जब आपको पकड़ा गया था, तो आपके पास से घड़ी और कपड़े मिले थे।

यह पूरी तरह झूठ है। घड़ी-वड़ी कुछ नहीं मिला था। मेरे कपड़े जो कोर्ट में दिखाये जा रहे हैं, वे कभी कोलकाता लाये ही नहीं गये थे। कालीपूजा के वक्त मेरे ससुर ने वो कपड़े दिये थे। उन्हें सिलवाकर बक्से में रखा था। जब पुलिस मुझे पकड़ने के लिए घर आयी थी, तो मुझे ले जाते वक्त कहा कि कपड़े दो। पुलिस ने कपड़े लिये और कहा कि ये कपड़े पहन लो। कोलकाता में कोर्ट में पेशी के लिए जाने पर भी यही कपड़े पहनना। और इसके बाद से ही पुलिस उस कपड़े को रिकवरी के रूप में दिखा रही है।

पारेख परिवार, उस बिल्डिंग के लोग, आपकी कंपनी के लोग सभी आपके खिलाफ जा रहे हैं। वे आपके ही खिलाफ क्यों जा रहे हैं ?

सभी तो मेरे खिलाफ नहीं हैं। पुलिस ने किया है यह सब। दशरथ मुर्मू (एक चश्मदीद गवाह) से पूछिये कि धनंजय यहां था कि नहीं। चश्मदीद गवाहों को लालबाजार ले जाकर  पुलिस मारपीट करेगी, तो बोलेगा ही। एक व्यक्ति को ट्रक के टायर में घुसाकर बरामदे में तीन बार घुमाकर टॉर्चर करे, तो वो बोलेगा ही।

ऐसा लालबाजार में होता है क्या ?

रोज होता है, अब भी हो रहा है लालबाजार में।

आपके परिवार में कौन-कौन हैं ?

मेरे परिवार में पिता जी, मां, दादा, भाभी, दीदी, भाई, तीन बहन और बीवी हैं।

आपकी शादी कब हुई थी ?

मेरा विवाह 27 फरवरी 1989 को हुआ था।

कोलकाता कब आये ?

20 या 25 मार्च को कोलकाता आ गया।

15 दिन पत्नी के साथ थे, पत्नी के साथ आपके संबंध कैसे रहे ?

पति और पत्नी के बीच जैसे संबंध रहता है, वैसा ही था। दोनों अपरिचित थे, लेकिन दोनों को एक दूसरे को अपना लेने की जरूरत होती है।

आपकी पत्नी जानती थी कि आप कोलकाता नौकरी करने जायेंगे ?

हां, सभी जानते थे कि मैं नौकरी करूंगा। मैंने मिलिटरी या पुलिस के किसी विभाग में नौकरी पाने की कोशिश की थी।

मिलिटरी या पुलिस में क्यों ?

मेरी बचपन से इच्छा थी, मिलटरी में जाने की। एक बार ट्रेनिंग के लिए मिलिटरी से कॉल आया था, तो पिताजी ने जाने नहीं दिया था। फिर मैंने सीआरपीएफ के लिए कोशिश की, लेकिन जिसके पास पैसा हो, या पहुंच हो उसे ही नौकरी मिलती है।

9 comments:

  1. जो मीडिया ट्रायल में तै हो जाता है , मैंने मार्क किआ कि वही जजमेंट कोर्ट से आ जाता है , अदालतों में नैतिक साहस की बहुत कमी है ,

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  2. https://www.change.org/p/prime-minister-mr-narendra-modi-scrap-gender-biased-law-in-india-misuse-of-feminist-law?recruiter=901012699&recruited_by_id=b16757e0-bdcf-11e8-9e4a-7f7307f3ac54&utm_source=share_petition&utm_medium=copylink&utm_campaign=petition_dashboard

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  3. Dhananjay ke sath anyay huaa, police ne use fasaya.

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  4. Mere ko bhi aisa lagta hai ki usko fasaya gaya tha

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  5. Nirdosh KO fasi dayna bharat Ka rebaaj ban chuka hai

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  6. Ek garib ko hi fasaya ke case close kardeta hai police sabasi lene ke liye

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